सूचना के बावजूद उपस्थित न होने वाले अधिकारियों का डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण

सूचना के बावजूद उपस्थित न होने वाले अधिकारियों का डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण

शमीम अहमद

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने आहरण एवं वितरण अधिकारियों की आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सूचना के बावजूद उपस्थित न होने वाले अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए उनका स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त बैठक उनके आदेश पर आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य यह था कि सभी आहरण एवं वितरण अधिकारी विभागीय देयकों के भुगतान के प्रति पूरी सजगता और सतर्कता के साथ बरतें और गंभीरतापूर्वक चेक करने के बाद ही अपने हस्ताक्षर एवं पोर्टल पर अनुमोदन करें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय रिर्जव बैंक की नई गाईलाइन के अनुपालन के लिए प्रतिबद्व है। उन्होंने यह भी बताया कि आरबीआई के नए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत वित्तीय अनियमितता होने पर आहरण एवं वितरण अधिकारी को उत्तरदायी माना जाएगा, जिसका उत्तरदायित्व संबंधित डीडीओ एवं संबंधित कर्मचारी का होगा।
जिलाधिकारी श्री मिश्रा आज पूर्वान्ह 11ः00 बजे कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आहरण एवं वितरण अधिकारियों के उत्तरदायित्व के सम्बन्ध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने वित्त (लेखा) अनुभाग-1 उ0प्र0 शासन लखनऊ के शासनादेश के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के कोषागारों में ई-पेमेंट लागू करने की प्रक्रिया के संबंध में आहरण वितरण अधिकारियों द्वारा ई-पेमेंट की स्थिति में भी हस्त निर्मित देयक भी कोषागार में प्रस्तुत किये जायेंगे। आहरण वितरण अधिकारियों द्वारा वेतन देयकों के लिए कर्मचारियों/अधिकारियों का डाटा इस कार्य के लिए विकसित विशेष सॉफ्टवेयर में फीड किया जायेगा, जिसमें संबंधित कर्मचारी/अधिकारी का नाम, सी0बी0एस0 खाता सं०, आई0एफ0एस0सी0 कोड, मोबाइल नम्बर, ईमेल आदि उल्लेख होगा जिसे बेनिफिशियरी फाईल कहा जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आहरण वितरण अधिकारियों द्वारा बेनिफिशियरी फाइल का निर्माण केवल उन्ही बैंकों एवं उनकी शाखाओं के लिए किया जाएगा जो सी०बी०एस० प्रणाली से आच्छादित हो एवं जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मानक 11 कैरेक्टर्स का अल्फा-न्यूमेरिक आई०एफ०एस०सी० कोड आवंटित किया गया हो। बेनिफिशियरी फाइल का निर्माण आहरण वितरण अधिकारी के अधीनस्थ लेखाकार अथवा लिखित रूप से अधिकृत कर्मचारी अपने लॉगिन के माध्यम से करेंगे तथा आहरण वितरण अधिकारी अपने लॉगिन से अप्रुव करेगे।
इस अवसर पर वरिष्ठ कोषाधिकारी सूरज कुमार ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि किसी कर्मचारी/अधिकारी का स्थानान्तरण होने के उपरान्त आहरण वितरण अधिकारी द्वारा बेनिफिशियरी फाइल को हटा दिया जायेगा। इसी प्रकार नये आने वाले कर्मचारी/अधिकारी के नाम की नई बेनिफिशियरी फाईल सृजित की जायेगी। आहरण वितरण अधिकारी द्वारा देयक/टोकन के आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से ट्रांजेक्शन फ़ाइल तैयार की जाएगी जिसमें डेबिट एवं क्रेडिट दो प्रकार की इन्ट्री होगी, जिसमें दोनों की धनराशि समान होगी। डेबिट एंट्री में देयक की शुद्ध धनराशि होगी, क्रेडिट इन्ट्री में प्रत्येक बेनिफिशियरी को देय धनराशि अलग-अलग अंकित होगी। उन्होंने यह भी बताया कि ई-पेमेन्ट प्रणाली के अन्तर्गत ई-चेक/टोकन तैयार किये जाने का कार्य आहरण वितरण अधिकारी के माध्यम से प्रारम्भ किया जाता है। अतः कोषागार द्वारा फाइनल ऑथराइजेशन के उपरान्त आहरण वितरण अधिकारी द्वारा ई-चैक/टोकन को प्रिंट करके रखे जाने की अनिवार्यत है, क्योकि इसी अभिलेख को कोषागार द्वारा भुगतान किये जाने वाले बैंक के रूप में मान्यता प्रदान की जायेगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष के ई-चेक/टोकन का भुगतान उसी वित्तीय वर्ष में किया जाना अनिवार्य होगा। ई-पेमेंट/टोकन के लिए प्रत्येक दशा में बेनिफिशियरी तथा ट्रांजैक्शन फाईल को आहरण वितरण अधिकारी द्वारा स्वयं अप्रूव किया जाना है। ट्रांजैक्शन फाइल के माध्यम से बेनिफिशियरी के प्रत्येक खाताधारक के सही बैंक खाते में फीडिंग/बैंकिंग के लिए आहरण वितरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप उत्तरदायी होंगे।

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