बलिदान नितिन का गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार, उमड़ी हजारों की भीड़, भर आईं लोगों की आंखें,

बलिदान नितिन का गमगीन माहौल में हुआ अंतिम  संस्कार उमड़ी हजारों की भीड़ भर आईं लोगों की आंखें

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट

बिजनौर,ग्रामभवानीपुर! सिक्किम आपदा में बलिदान हुए नितिन का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ शनिवार को उनके गांव भवानीपुर पहुंचा। बलिदान नितिन की अंतिम यात्रा में शामिल होने और श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ गांव के ही भवानी मंदिर परिसर में बलिदान नितिन का अंतिम संस्कार किया गया। सैन्य बैंड से शोक संगीत बजाया और बंदूकों से सलामी दी। शनिवार की सुबह फूलों से सजे सेना के वाहन से बलिदान जवान नितिन कुमार ढाका का पार्थिव शरीर उनके गांव ले जाया गया। इस सैन्य वाहन के संग बिजनौर से चंदक का सैकड़ों वाहनों का काफिला रहा। चंदक में व्यापारियों ने बाजार को बंद रखा। जगह-जगह पार्थिव शरीर लेकर आए वाहन पर पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी गई। चंदक से गांव भवानीपुर तक शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ शामिल रही। सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी, डीएम अंकित कुमार अग्रवाल, एसपी नीरज कुमार जादौन, भाजपा नेता ऐश्वर्य मौसम चौधरी, ब्लॉक प्रमुख तपराज, रालोद नेता डॉ. नीरज चौधरी, डॉ. बीरबल आदि, बलिदान के गांव तक अंतिम यात्रा में शामिल रहे। बलिदान नितिन का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचते ही परिवार ही नहीं बल्कि गांव वालों की आंख भी नम हो गई। गमजदा लोगों ने भारत माता की जय और शहीद नितिन अमर रहे के नारे लगाए। डीएम, एसपी और सैन्य जवानों और भूतपूर्व सैनिकों ने शहीद को सलामी दी। सैन्य बैंड से शोक संगीत की धुन बजाते हुए आठ सैनिकों ने 24 राउंड फायरिंग कर सलामी दी। गांव के ही भवानी मन्दिर परिसर में बलिदान की चिता को मुखाग्नि दी गई। बादल फटने पर सैलाब की चपेट में आ गई थी सैन्य टुकड़ी,  बिजनौर ग्राम भवानीपुर, निवासी राजेश कुमार के पुत्र नितिन कुमार ढाका 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। पिछले साल तीन अक्तूबर को सिक्किम सैन्य अभ्यास के बाद नितिन अपनी कंपनी के संग पश्चिम बंगाल लौट रहे थे। तभी वहां बादल फटने के बाद नितिन पूरी टुकड़ी के संग लापता हो गए। सर्च ऑपरेशन के बाद भी नितिन ढाका का लगभग तीन महीनों तक कोई सुराग नहीं लग पाया था। अब सेना की ओर से 13 फरवरी को नितिन के परिजनों को जवान के बलिदान होने की खबर दी गई। दरअसल, उनके पार्थिव शरीर की पहचान डीएनए टेस्ट से हो सकी। नितिन के बलिदान होने की सूचना के बाद नितिन का छोटा भाई उसी दिन पार्थिव शरीर लेने के लिए पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जनपद के बिनागुड़ी छावनी के लिए रवाना हो गए थे। एसडीएम विजयवर्धन सिंह, भाकियू जिलाध्यक्ष सत्यवीर सिंह, भाकियू नेता राजेंद्र सिंह, मंडल अध्यक्ष बाबूराम तोमर, किसान नेता दिगंबर सिंह, मिल अधिकारी नरपत सिंह, सुबोध पाराशर, सुधीर पाराशर, भूतपूर्व सैनिक समेत जिले और क्षेत्र के तमाम लोग शामिल रहे।

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