30 साल के इंतजार के बाद हुकुमचंद मिल मजदूरों को मिलेगी राहत, CM पहुंच रहे इंदौर, वर्चुअली जुड़ेंगे प्रधानमंत्री

  1. 30 साल के इंतजार के बाद हुकुमचंद मिल मजदूरों को मिलेगी राहत, CM पहुंच रहे इंदौर, वर्चुअली जुड़ेंगे प्रधानमंत्री

 

 

 

:मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज यानी सोमवार को इंदौर आ रहे हैं. वे यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित किए जा रहे ‘मजदूरों के हित, मजदूरों को समर्पित कार्यक्रम’ में शामिल होंगे!

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट

मध्य प्रदेश!  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़ेगे और हुकुमचंद मिल के मजदूरों से संवाद करेंगे. यह कार्यक्रम इंदौर के नंदा नगर क्षेत्र स्थित कनकेश्वरी धाम में आज 25 दिसंबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगा. इस अवसर पर हुकुमचंद मिल मजदूरों के तीस वर्ष से पेंडिंग केस में 4 हजार 800 श्रमिकों को राहत मिलेगी और उनके परिवारों के लगभग 25 हजार सदस्य लाभान्वित होंगे.

322 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन और 105 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 विभागों के कुल 71 कार्यों का लोकार्पण करेंगे. इन विकास कार्यों की कुल लागत 105.73 करोड़ है. इसी तरह 3 विभागों के विकास कार्यों का भूमिपूज और शिलान्यास भी किया जाएगा. जिनकी कुल लागत 322.85 करोड़ है. आयोजन स्थल पर विकसित भारत संकल्प यात्रा शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है. मुख्यमंत्री यादव मंच से केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित करेंगे. डॉ यादव 175 दिव्यांगजनों को रेट्रोफिटेड स्कूटी का वितरण भी करेंगे. इसी के साथ ही रेडक्रॉस में डोनेशन के लिए रेडक्रॉस एप का भी शुभारंभ किया जाएगा!

30 वर्षों से लंबित चले आ रहे प्रकरण के समझौता प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने किया पास

गौरतलब है कि हुकुमचंद मिल करीब 70 साल सफलता पूवर्क चलने के बाद 1992 में बंद हो गई थी. मिल मजदूर और बैंकों की देनदारियां 30 वर्षों तक न्यायालय और अन्य प्रक्रिया में लंबित रहीं. राज्य शासन ने पहली बार 2022 में पहल की और गृह निर्माण मंडल को समझौता कर, राशि भुगतान का उत्तरदायित्व दिया गया. एक साल के अंदर सभी दावेदारों के साथ समझौता सुनिश्चित कराया गया और श्रमिक यूनियन के साथ भी सहमति सहित समझौता हुआ. उच्च न्यायालय ने समझौता प्रस्ताव को सहमति दी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 दिसंबर 2023 को स्वीकृति प्रदान की और 20 दिसंबर को उच्च न्यायालय में राशि जमा कर दी गई.

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