अनोखी रस्म: बिजनौर में पिता ने खुद पढ़ाया अपनी बेटी का निकाह, कई उलमा भी रहे मौजूद

अनोखी रस्म: बिजनौर,के  नजीबाबाद में पिता ने खुद पढ़ाया अपनी बेटी का निकाह, कई उलमा भी रहे मौजूद

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट

नजीबाबाद! बिजनौर के नजीबाबाद में एक अनोखी रस्म देखने को मिली। यहां एक पिता ने अपनी बेटी की शादी के दिन खुद ही निकाह पढ़ाया। इस दौरान समारोह में शामिल लोग भी हैरान रह गए। उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद में एक अनोखी रस्म अदा की गई। हाफिज बाप ने अपनी बेटी की शादी में खुद बेटी का निकाह पढ़ाया। निकाह के वक्त नगर के कई उलमा मौजूद रहे। अमरोहा से तहसीलदार पद से सेवानिवृत हुए हाफिज हाजी शमीम अहमद की बेटी रुशदा हाशमी की शादी नजीबाबाद निवासी मो.आदिल अख्तर के साथ हुई। निकाह के बीच उस वक्त लोग हैरत में पड़ गए जब बेटी रुशदा हाशमी के पिता हाफिज हाजी शमीम अहमद ने बेटी का  निकाह खुद पढ़ाया।निकाह के वक्त जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मो. ईसा, मुफ्ती उवैस अहमद शिबली, मुफ्ती अरशद ,मुफ्ती अब्दुल्लाह, कारी अकील अहमद, मौलाना असलम कासमी मौजूद रहे। हाफिज शमीम अहमद ने कहा कि उलमा के मशवरा से उन्होंने बेटी का वारिस होने के नाते निकाह पढ़ा कर सुन्नत अदा की है। शमीम अहमद फरमाते हैं कि निकाह, जनाजे की नमाज, गुसल वगैरा में वारिस का हक बनता है।मैंने इसी हक को उलमा के मशवरा पर अंजाम दिया। 

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